🔳 बंजर खेतों में उगी झाड़ियां वन्य जीवों के छिपने का अड्डा
🔳 गांवों में सुनवाई को वन्य जीव बना रहे अपना कोरीडोर
🔳 पलायन से खाली हो चुके गांवों में तेजी से घुसपैठ कर रहे गुलदार
🔳 खत्म हो चुकी चहल पहल से गांवों की ओर बढ़ रहे वन्य जीव
[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]

गुलदार व जंगली सूअरों की गांवों में घुसपैठ चिंता का विषय बन गई है। लगातार घटनाएं सामने आने से गांवों के लोग दहशत में जीवन बिताने को मजबूर हो चुके हैं। पलायन से विरान हो चुके गांवों की सुनसानी कहीं न कहीं गुलदार व जंगली जानवरों के लिए घुसपैठ में मददगार बन रही है। गांवों में उगी बड़ी बड़ी झाड़ियां वन्यजीवों के छुपने की जगह में तब्दील होती जा रही है। कभी आबाद लेकिन वर्तमान में बंजर खेत वन्यजीवों को कोरीडोर बढ़ाने में मददगार बन गए हैं।
कुमाऊं व गढ़वाल के तमाम गांवों में गुलदार, जंगली सूअर तथा भालू के हमले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। आए दिन लोग वन्यजीवों के हमले में जान गंवा रहे हैं। घायलों की संख्या भी लगातार बढ़ती ही जा रही है। मूलभूत सुविधाए उपलब्ध न होने से परेशान गांवों के लोग अब वन्यजीवों के लगातार बढ़ रहे हमलों से दहशत में हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा समेत अन्य सुविधाएं न होने से लोग गांव छोड़कर नगरीय क्षेत्रों की ओर रुख करने को मजबूर हो चुके हैं ऐसे में गांव के गांव सुनसान होते जा रहे है। गांवों में व्याप्त विरानी भी वन्य जीवों की घुसपैठ का एक बड़ा कारण बनती जा रही है। जंगल से सटे गांवों में गुलदार व अन्य वन्यजीव आसानी से घुसपैठ कर जा रहे हैं। खेती चौपट होने से कृषि भूमि में खड़ी झाड़ियां वन्य जीवों के छिपने का अड्डा बनती जा रही है। वन्यजीवों के लगातार बढ़ते दायरे से गांवों में शेष रह चुके ग्रामीण दहशत में हैं। मवेशियों के मारे जाने से पशुपालक भी परेशान हैं। शांत गांवों को अपना कोरीडोर समझ रहे गुलदार किसी के भी सामने आने पर हमलावर हो जा रहे हैं। ऐसे में लगातार घटनाएं बढ़ती जा रही है। वन क्षेत्राधिकारी भवाली विजय मेलकानी ने भी माना है की गांव खाली होने से उगी बड़ी बड़ी झाड़ियां गुलदार व अन्य वन्यजीवों का वास स्थल बन रहे हैं। शांति में खलल पड़ने पर वन्य जीव हमलावर हो रहे हैं।

error: Content is protected !!