🔳 कई विधानसभा, लोकसभा व पंचायत चुनावों के बाद भी ग्रामीण सड़क सुविधा से वंचित
🔳 स्कूली नौनिहाल रोजाना दस किमी से भी अधिक की नाप रहे दूरी
🔳 बुजुर्गो को अस्पताल लाने ले जाने में डोली एकमात्र सहारा
🔳 कई बार आवाज उठने के बावजूद जिम्मेदार नहीं ले रहे सुध
[[[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]]]]
बेतालघाट ब्लॉक के सूदूर कोटा धिरीया व खड़की गांव के पचास से ज्यादा परिवारों आज भी सड़क सुविधा का इंतजार है। सड़क निर्माण न होने से स्कूली बच्चे, किसान व बुजुर्ग रोजाना पांच किमी से भी अधिक की पैदल दूरी नापने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार लोकसभा, विधानसभा व पंचायत चुनावों में प्रत्याशी गांव पहुंचकर ग्रामीणों को आश्वासनों की घुट्टी तो दे जाते हैं पर चुनाव निपटने के बाद गांव की ओर पलटकर तक नहीं देखते।
प्रत्येक पांच वर्ष में होने वाले सांसद, विधायक व पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव में कोटा धिरीया व खड़की गांव के ग्रामीणों को सड़क सुविधा उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया जाता है। पर चुनाव के बाद दावे हवा हवाई ही साबित होते हैं। आजादी के बाद भी दोनों गांवो के ग्रामीण सड़क सुविधा के लिए तरस रहे हैं। बेहतर भविष्य निर्माण की उम्मीद में नौनिहाल रोजाना गांव से पैदल दूरी नाप बेतालघाट व सेठी क्षेत्र में स्थित विद्यालय पहुंच रहे हैं। जंगल का रास्ता होने से नौनिहालों की जिंदगी पर जंगली जानवरों के हमले का खतरा भी मंडराता रहता है। गांव से बुजुर्गो व गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने को डोली का सहारा लिया जाना आम बात हो चुकी है। खेतीबाड़ी के क्षेत्र में भी दोनों गांव अव्वल है पर उपज को मंडी तक पहुंचाना डेढी खीर है। सड़क सुविधा उपलब्ध न होने से गांव आज भी विकास से कोसों दूर है। स्थानीय धाम सिंह, श्याम सिंह, नैन सिंह, भुवन सिंह के अनुसार लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग उठाई जा रही है पर कोई सुध लेने को तैयार नहीं है खामियाजा गांव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। चुनाव के समय उम्मीदवार व उनके समर्थक गांव पहुंचकर सड़क निर्माण का भरोसा दिलाते हैं पर चुनाव निपटने के बाद कोई दोबारा झांकने तक नहीं आता जिस कारण अब नेताओं से भी भरोसा उठने लगा है। बेतालघाट व्यापार मंडल अध्यक्ष बालम सिंह बोहरा के अनुसार कोटा धिरीया व खड़की गांव के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। साफ कहा की गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए अब व्यापारी गांव के लोगों को साथ लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार करके। गांव तक सड़क निर्माण होने के बाद ही पीछे हटा जाएगा। ग्राम प्रधान संगठन के निवर्तमान प्रदेश सचिव शेखर दानी ने भी गांव की समस्या के समाधान के लिए संघर्ष का ऐलान किया है।
