🔳 लंबे समय से बदहाली का दंश झेल रहा था ट्रैक
🔳 घंटों की मशक्कत के बाद जिम्मेदारों को दिखाया आईना
🔳 बदहाल ट्रैक पर आए दिन चोटिल हो रहे थे युवा बावजूद नहीं ली जा रही थी सुध
🔳 सुबह से शाम तो कभी रात के अंधेरे में भी तैयार किया सपनों का ट्रैक
[[[[[[[[[ द्वाराहाट डेस्क की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]

द्वाराहाट के विपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज का मैदान कभी युवाओं के लिए गर्व का केंद्र रहा है लेकिन समय के साथ यह धीरे-धीरे अपनी चमक खोता जा रहा हैं। लंबे समय से मैदान की हालत बिगड़ती जा रही हैं। खासतौर पर रनिंग ट्रैक पर युवाओं को चोटिल होने का खतरा बढ़ गया था। स्थानीय प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की ओर से इस ओर ध्यान न देने से द्वाराहाट के युवाओं ने इसे दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया और बेलचे फावड़े लेकर ट्रैक को दुरुस्त करने को मैदान में उतर गए।
युवाओं ने अपने सुनहरे भविष्य के सपनों को साकार करने के लिए बेहतरीन कदम उठाकर शानदार पहल की है। जिम्मेदारों के सुध न लेने पर फैसला किया कि वे खुद मैदान को बेहतर बनाएंगे और एक सुरक्षित रनिंग ट्रैक तैयार करेंगे। उनके पास न तो बड़े संसाधन थे और न ही कोई आधुनिक मशीनरी, लेकिन उनके पास था असीम उत्साह और मेहनत की भावना।
सुबह और शाम को और कई बार रात के अंधेरे में भी, ये युवा कुदाल और फावड़े लेकर मैदान में जुट गए। उन्होंने बड़े-बड़े गड्ढों को मिट्टी और पत्थरों से भरना शुरु किया। एक एक गड्ढा भरने के बाद वे सतह को समतल करने में जुट गए, ताकि रनिंग के लिए एक सुरक्षित ट्रैक बन सके। यह काम आसान नहीं था—धूप, बारिश, और थकान के बावजूद इन युवाओं ने हिम्मत नहीं हारी। उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि दो दिन की कड़ी मशक्कत के बाद मैदान के चारों तरफ एक शानदार रनिंग ट्रैक तैयार हो गया, जो रनर्स के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस पहल में शामिल युवा राहुल बिष्ट, पवन बोरा, अर्जुन मेहरा, गौरव पाण्डेय, गोपाल बिष्ट, मनीष रौतेला, सचिन नेगी और सागर ने बताया, की हमारे लिए यह सिर्फ एक ट्रैक नहीं, बल्कि हमारे सपनों का प्रतीक है। कई साथी रनिंग के दौरान चोटिल हो रहे थे, और हमें लगा कि अगर हम कुछ नहीं करेंगे, तो स्थिति और खराब होगी। इसलिए हमने खुद कदम उठाया। कहा की हमारा मकसद सिर्फ ट्रैक बनाना नहीं, बल्कि दूसरों को प्रेरित करना भी हैं कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो कुछ भी असंभव नहीं। युवाओं के उठाए गए कदम से पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश है। आज के युवा न केवल अपने भविष्य के प्रति जागरूक हैं बल्कि समाज के लिए भी कुछ कर गुजरने की क्षमता रखते हैं। अगर युवा कुछ करने की ठान लें, तो उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है।

error: Content is protected !!