🔳 जीआईसी मंडलकोट में विद्यार्थियों की जिंदगी पर मंडरा रहा संकट
🔳 जर्जर छत बन सकती है बड़ी अनहोनी का कारण
🔳 बारिश के दौरान दोगुना बढ़ जा रहा खतरा
🔳 प्रधानाचार्य ने आपदा प्रबंधन विभाग को पत्र भेजकर दी खतरे की जानकारी
🔳 शिक्षा विभाग के अफसरों की नहीं टूट रही कुंभकरणीय नींद
[[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]]
राजकीय इंटर कॉलेज मंडलकोट में विद्यार्थियों की जिंदगी पर खतरा बढ़ता ही जा रहा है बावजूद जिम्मेदारों की कुंभकरणीय नींद नहीं टूट रही। कक्षा कक्षों में दरकती छत से अनहोनी का अंदेशा बना हुआ है। बारिश के दौरान खतरा दोगुना बढ़ जा रहा है। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने अब आपदा प्रबंधन विभाग को पत्र भेज विद्यालय की स्थिति की जानकारी दे ठोस कदम उठाए जाने पर जोर दिया है।
गांवों में स्थित शिक्षा के मंदिरों की बिगड़ती स्थिति शर्मसार कर रही है। नौनिहाल सिर के उपर मंडरा रहे खतरे के बीच शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हो चुके हैं पर जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे। कुछ ऐसी ही हकीकत बयां कर रहा है ताड़ीखेत ब्लॉक के मंडलकोट गांव में स्थित राजकीय इंटर कॉलेज। विद्यालय में आसपास के गांवों से 160 बच्चें शिक्षा ग्रहण करने पहुंचते हैं पर कक्षा कक्षों की स्थिति से नौनिहाल भी दहशत में हैं। विद्यालय के पांच कक्षा कक्षों के हालात विकट है। जर्जर हालत में पहुंच चुकी छत से अनहोनी का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने पर कक्षा कक्षों में बैठना दुश्वार हो रहा है। कक्षा कक्षों की बदहाल स्थिति से विद्यार्थियों के साथ ही विद्यालय में तैनात शिक्षकों पर भी खतरा मंडरा रहा है। कभी भी जर्जर हालत में पहुंच चुकी छत के गिरने का अंदेशा है। अभिभावक भी कई बार हालात सुधारने की मांग उठा चुके हैं पर अफसर अनसुनी कर दे रहे हैं। ऐसा लगता है मानो किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा हो। विद्यालय की प्रधानाचार्य ललित सिंह अधिकारी के अनुसार उच्चाधिकारियों को पूर्व में भी पत्राचार किया जा चुका है। बीते वर्ष हालात इतने विकट हो गए की 12वीं कक्षा का संचालन आंगनबाड़ी केंद्र में करना पड़ा। प्रधानाचार्य के अनुसार आपदा प्रबंधन विभाग को भी पत्र भेजकर स्थित की जानकारी दी जा चुकी है अत्यधिक बारिश होने की दशा में दसवीं व बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को स्कूल छोड़ने की अनुमति मांगी गई है ताकि खतरा टाला जा सके। बच्चों के अभिभावकों व गांवों के तमाम लोगों ने भी विद्यालय की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है साथ ही सुध न लिए जाने पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। जल्द खतरा टालने को ठोस उपाय किए जाने की मांग उठाई है। चेतावनी दी है की यदि अनदेखी की गई तो फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया जाएगा।
