🔳 बेतालघाट ब्लॉक के बारगल ग्राम पंचायत में सुविधाओं का बुरा हाल
🔳 गरमपानी बाजार में बने सुलभ शौचालय की स्थिति बदहाल
🔳 बारगल गांव में बना जनमिलन केंद्र देखरेख को तरसा
🔳 रामगाढ़ क्षेत्र में खस्ताहाल पुल से नदी पार करना बनी नियति
[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]
बेतालघाट ब्लॉक के ग्राम पंचायत बारगल के ग्रामीणों ने भले ही कई पंचायतों के कार्यकाल व चुनाव से पूर्व किए गए दावों व वादे जरुर देख लिए हो पर जमीनी हकीकत कुछ और ही दशा बंया कर रही है। पंचायत के एक तोक गरमपानी में बने शौचालय की दशा हवाई दावों और वादों की पोल खोलने के लिए काफि है। गांव में बना जनमिलन केंद्र के चारों ओर उगी बड़ी बड़ी घास ग्रामीणों को मुंह चिढ़ा रही है। रामगाढ़ क्षेत्र में शिप्रा नदी पर बनी पुल की दुर्दशा भी किसी से छिपी नहीं है।
गांव के सरकार के गठन की तैयारियां तेज हो गई है। हर कोई सरकार में पद पाने के लिए जी तोड़ मेहनत में जुटा हुआ है। प्रत्याशी एक एक मतदाता को अपने पक्ष में करने को समीकरण तैयार कर रहे हैं पर प्रत्येक पांच वर्ष में होने वाले चुनाव में किए जाने वाले दावे व वादों का असर गांवो में बिल्कुल भी नहीं दिख रहा। बेतालघाट ब्लॉक के बारगल ग्राम पंचायत की बात करें तो यहां भी हालात विकट है। बारगल ग्राम पंचायत के दायरे में आने वाले गरमपानी बाजार में पर्यटकों व यात्रियों की सुविधा के लिए बने सुलभ शौचालय की बदहाल स्थिति बहुत कुछ हकीकत बयां कर दे रही है। मुख्य बाजार क्षेत्र में बने शौचालय की बदहाली का खामियाजा पर्यटकों व यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोग भी उठा रहे हैं। रामगाढ क्षेत्र से ग्राम पंचायत के सैकड़ों लोग शिप्रा नदी पर बनी पुल से आवाजाही करते हैं पर जिम्मेदारों ने आज तक पुल को दुरुस्त करने की जहमत नहीं उठाई जिस कारण ग्रामीण जान जोखिम में डाल आवाजाही को मजबूर हो चुके हैं। स्थानीय गोधन सिंह बर्गली के अनुसार गांव में वर्षों पूर्व विधायक निधि से बना जनमिलन तक केंद्र देखरेख का इंतजार कर रहा है। देखरेख के अभाव में आसपास उगी घास से केंद्र में बैठना तक दूभर हो चुका है। वहीं गांव में स्थित विद्यालय की स्थिति भी विकास के ढोल पीटने वालों के लिए करारा जवाब है। कई अव्यवस्थाओं से घिरी ग्राम पंचायत के ग्रामीण फिर इस बार सब कुछ बेहतर होने की उम्मीद लगाए मतदान को तैयार हैं। अब देखना रोचक होगा की ग्रामीण किसे गांव के विकास को जिम्मेदारी सौंपते हैं और फिर नए पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीणों की उम्मीद पर खरा उतरते हैं।
