🔳 बेतालघाट के बाद अब रामगढ़ ब्लॉक में योजना को धरातल में उतारने की तैयारी
🔳 कोसी घाटी में 92 महिला पशुपालकों को भी योजना से किया गया लाभान्वित
🔳 95 अनुसुचित जाति वर्ग के पशुपालकों को भी मिला लाभ
🔳 कोसी घाटी के विभिन्न गांवों के 200 ग्रामीण योजना के दायरे में
[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]

प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी गोट वैली योजना कोसी घाटी के पशुपालकों के लिए संजीवनी बन गई है। ब्लॉक के एक दर्जन से अधिक गांवों में करीब दो सौ पशुपालकों को योजना से लाभान्वित किया जा चुका है। खास बात यह है की योजना में महिला पशुपालकों को जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराया गया। जनपद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. धीरेश जोशी के अनुसार बेतालघाट के बाद अब रामगढ़ ब्लॉक में भी पशुपालकों को भी गोट वैली योजना से लाभान्वित किया जाए।
बेतालघाट ब्लॉक के धनियाकोट, बेतालघाट, सिमलखा, बर्धो, अमेल, ज्योग्याडी़ समेत करीब दर्जनभर से ज्यादा गांवों के करीब दो सौ पशुपालकों को गोट वैली योजना से जोड़कर पशुपालन विभाग ने योजना को धरातल में उतार दिया है। बेतालघाट के बाद अब संबंधित विभाग ने रामगढ़ ब्लॉक के पशुपालकों को योजना से लाभान्वित करने को तैयारी तेज कर दी है। पहले चरण में बेतालघाट ब्लॉक के गांवों में शुरु हुई योजना से 92 महिला पशुपालकों को भी लाभान्वित किया गया है। खासतौर पर सूदूर गांवों के अंतिम छोर पर रहने वाले करीब 95 आनुसुचित जाति वर्ग के पशुपालकों को योजना से जोड़ आत्मनिर्भर बनाया गया है। योजना के सटीक संचालन के लिए पशुपालन विभाग के चिकित्सक व कर्मचारी लगातार मॉनिटरिंग में भी जुटे हुए हैं। समय-समय पर गांव में विशेष शिविर लगाकर बकरियों की स्वास्थ्य जांच के साथ ही चारा आदि का वितरण भी किया जा रहा है। जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. धीरेश जोशी के अनुसार बेतालघाट ब्लॉक के गांवों में योजना से काफि पशुपालक जुड़े हैं। जल्द ही रामगढ़ ब्लॉक के कुछ गांवों में भी योजना से पशुपालकों को लाभान्वित किया जाएगा।

ऐसे शुरु हुई गोट वैली योजना

प्रदेश सरकार ने गांवों के बाशिंदों को स्वरोजगार से जोड़ने को गोट वैली योजना का खाका तैयार किया। जिलाधिकारी वंदना सिंह की पहल पर पशुपालन विभाग ने बेतालघाट ब्लॉक के गांवों में कलस्तर तैयार कर ग्रामीणों को योजना से लाभान्वित करने को धरातल पर कार्य शुरु किया। नियमानुसार लाभार्थी को शुरुआत में पांच बकरियों को खरीदने के लिए तीस हजार रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया जिसे एक वर्ष में अदायगी का प्रावधान रखा गया। फिर दोबारा पशुपालकों को दस बकरियों व एक बकरा खरीदने के लिए 51 हजार रुपये की अनुदान राशि उपलब्ध कराई गई। शुरुआती चरण में ग्राम पंचायत की खुली बैठक में पशुपालकों के नाम का प्रस्ताव पास होने के बाद अनुमोदन को जिलाधिकारी के पास भेजा गया। स्वीकृति के बाद लाभार्थी को योजना से जोड़ लाभान्वित करना शुरु किया गया। योजना में मनरेगा योजना से बकरी बाड़ा तैयार करने के साथ ही योजना के तहत खरीदी गई बकरियों का बीमा भी करवाया गया ताकी गुलदार व अन्य जंगली जानवरों के हमले में बकरियों के मारे जाने पर पशुपालकों को नुकसान का समुचित मुआवजा भी मिल सके।

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