◾ जल जीवन मिशन योजना से पानी का सूखा खत्म करना बना सपना
◾ लंबा समय बीतने के बावजूद कई गांवों में आधी अधूरी बन सकी योजना
◾ तमाम गांवों में लोग आज भी कर रहे पानी का इंतजार
◾योजना की आड़ में लगने लगे हैं बड़े भ्रष्टाचार के आरोप
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
जल जीवन मिशन योजना के तहत गांवो में पानी सूखा खत्म करने को खूब ढोल पीटे गए पर लंबा समय बीतने के बावजूद गांवों के बाशिंदे बूंद बूंद पानी को मोहताज हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना बेतालघाट ब्लॉक के तमाम गांवों में हांफने लगी है। भारी भरकम बजट खर्च होने के बावजूद गांवों में गहराते पेयजल संकट से तमाम गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं यही नहीं योजना की आड़ में बड़े पैमाने हुए भ्रष्टाचार के आरोप भी लगने लगे हैं।
बेतालघाट ब्लॉक में जल जीवन मिशन योजना सवालों से घिर गई है। तमाम गांवों में पेयजल आपूर्ति को लाखों रुपये की धनराशि खर्च हो जाने के बावजूद पेयजल आपूर्ति तो छोड़िए पानी की बूंद तक नहीं टपक सकी है। जहां बसगांव क्षेत्र में गंदे पानी की आपूर्ति का मुद्दा जोरशोर से उठ रहा है तो वहीं बजेडी़, बुधलाकोट, मल्लीपाली, डंडेसारी, टगूयूडा, तल्लीपाली, दाडिमा समेत तमाम गांवों में भी योजना पर सवाल खड़े होते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ गांवों के बाशिंदों को न मिल पाने से लोगों में नाराजगी भी बढ़ती ही जा रही है। ग्राम प्रधान संगठन उत्तराखंड के प्रदेश सचिव शेखर दानी के अनुसार योजना शुरु होने से पहले ही दम तोड़ने लगी है। आरोप लगाया की भारी भरकम धनराशि खर्च किए जाने के बावजूद गांवों के लोगों को लाभ न मिल पाना योजना के निर्माण में बरती गई लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है। धनियाकोट निवासी कृपाल सिंह मेहरा ने बेतालघाट ब्लॉक में जल जीवन मिशन योजना के कार्यों की जांच की मांग उठाई है। साफ कहा की योजना निर्माण में बड़े स्तर पर लापरवाही की गई है। मुनाफे के फेर में बजट ठिकाने लगा गांवों के वासिदों के हितों से खिलवाड़ किया गया है।
