◾ शिप्रा नदी का बहाव तेज होने पर बढ़ सकती है मुश्किलें
◾सुविधाएं जुटाने व सुरक्षित स्थानों को चिह्नित किए जाने पर जोर
◾ दो वर्ष पूर्व आपदा का दंश झेल चुके हैं कोसी घाटी के वासिंदे
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
मानसून से पूर्व व्यवस्थाएं चाक-चौबंद किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारियों ने संभावित खतरे को देखते हुए बरसात से पहले ही क्षेत्र में सुविधाएं जुटाने की मांग उठाई है ताकी बरसात के समय लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर स्थित गरमपानी खैरना क्षेत्र आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। बाजार के ठिक पीछे बहने वाली शिप्रा का रौद्र रुप आज तक लोग नहीं भुला सके हैं। दो वर्ष पहले क्षेत्र में तबाही मचाने वाली शिप्रा से बरसात में फिर खतरा मंडरा रहा है। दो वर्ष पूर्व शिप्रा के रौद्र रूप से लोगों को घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था। बाजार के वासिदों ने कई दिन व रात जीआइसी खैरना में बिताई। सुविधाओं के अभाव में लोगों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा। व्यापारिक संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष विरेंद्र सिंह बिष्ट, मनीष तिवारी, फिरोज अहमद, बिशन जंतवाल, राकेश जलाल, गंगा सिंह, कैलाश पिनारी के अनुसार नदी क्षेत्र में सुरक्षा कार्य नहीं हो सके हैं जिससे खतरा बरकरार है। नदी का उफान तेज होने पर दो वर्ष पूर्व जैसे हालात बन सकते हैं। ऐसे में बरसात से पूर्व ही सुविधाएं जुटाने के साथ ही व्यवस्थाओं को चाक चौबंद किया जाना आवश्यक है ताकी क्षेत्रवासियों को परेशानियों का सामना न करना पड़ें। व्यापारियों ने समुचित राशन, की आपूर्ति, रहने के लिए सुरक्षित स्थानों को चिन्हित करने के साथ ही अतिरिक्त व्यवस्थाओं को दुरुस्त किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है।
