= पर्यावरण प्रदूषित किए जाने का लगाया आरोप
= जहरीले धुए से फसल व ग्रामीणों का स्वास्थ्य खराब होने की आशंका
= मनमानी पर उग्र आंदोलन का ऐलान
(((कुबेर जीना/अंकित सुयाल/मनीष कर्नाटक/महेंद्र कनवाल की रिपोर्ट)))
क्वारब क्षेत्र में संचालित डामर प्लांट से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ ही कोसी नदी पर गंदगी डाले जाने से क्षेत्र के महिलाओं व पुरुषों का सब्र जवाब दे गया। ग्रामीण डामर प्लांट परिसर में जा धमके। नारेबाजी कर रोष जताया। सूचना पर चौकी पुलिस भी पहुंची। बमुश्किल ग्रामीणों को शांत कराया। तय हुआ कि एसडीएम कार्यालय में प्लांट संचालक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेगा तभी प्लांट का संचालन होगा। फिलहाल डामरीकरण प्लांट का संचालन बंद कर दिया गया।
रविवार को क्वारब क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक महिला व पुरुष क्वारब – मोना मोटर मार्ग पर लगे डामर प्लांट में जा धमके। नारेबाजी कर गुबार निकाला। आरोप लगाया कि डामरीकरण प्लांट से पर्यावरण लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। गांव की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। जहरीले धुएं से ग्रामीण परेशान है। डामर प्लांट से निकल रहे जहरीले धुएं से क्षेत्र के लोगों के बीमारी की चपेट में आने की आशंका बनी हुई है कहा कि बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के ही डामर प्लांट स्थापित कर दिया गया है जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूचना पर क्वारब चौकी पुलिस के जवान भी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। तय हुआ कि प्लांट संचालक एसडीएम कार्यालय में गांवों के लोगों के अनापत्ति प्रमाण पत्र दिखाने के बाद ही प्लांट का संचालन होगा। ग्रामीणों ने कहा कि तब तक प्लांट संचालन नहीं किया। दो टूक चेतावनी दी कि यदि मनमानी की गई तो फिर उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान इंदर सिंह, गोपाल सिंह, नीमा लटवाल, नर सिंह, महेंद्र सिंह, हर्ष सिंह, हरेंद्र सिंह, संजय सिंह, परुली देवी समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
