🔳 राजस्व व रेगुलर पुलिस अधिकार क्षेत्र के विवाद में उलझी
🔳 ग्रामीणों व स्वजनों का चढ़ा पारा, पुलिस प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी
🔳 जिंप सदस्य ने कुमाऊं आयुक्त को दूरभाष पर दी मामले की जानकारी
🔳 पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी
🔳 हरकत में आई पुलिस ने सात घंटे बाद शव को निकाला नदी से बाहर
[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]

अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर स्थित काकडी़घाट क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लापता सुनियाकोट गांव की महिला का शव कोसी नदी क्षेत्र में संदिग्ध हालात में मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंचे स्वजनों व ग्रामीणों ने शव की शिनाख्त की।पुलिस प्रशासन के मौके पर पहुंचने के बावजूद सात घंटे तक शव नदी से बाहर नहीं निकाला जा सका। ग्रामीणों के रोष जताने व अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे को जाम करने की चेतावनी के बाद हरकत में आई पुलिस ने शव को नदी से बाहर निकाला। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल शव के एक दूसरे के क्षेत्र में होने की बात कहता रहा जिस कारण सात घंटे से भी अधिक समय तक बाहर नहीं निकाला जा सका।
हाईवे से सटे सुनियाकोट गांव निवासी हरीश सिंह मेहरा की पत्नी खष्टी मेहरा (42) बीते चार जून को बगैर किसी को कुछ बताए घर से निकल गई। स्वजनों ने काफि खोजबीन की पर कुछ पता न चलने से पुलिस को गुमशुदगी की रिपोर्ट सौंप खोजबीन की गुहार लगाई।शनिवार को ग्रामीणों ने कोसी नदी में महिला का शव देख सूचना आसपास के क्षेत्रों व पुलिस प्रशासन को दी। सूचना पर पहुंचे स्वजनों ने शव की शिनाख्त खष्टी देवी के रुप में की। मौके पर राजस्व व रेगुलर पुलिस भी पहुंची पर दोनों शव को एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र में होने की बात कहते रहे। घंटों तक शव को बाहर न निकालें जाने से ग्रामीणों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। ग्रामीणों व स्वजनों ने काकड़ीघाट मोटर मार्ग पर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। जिला पंचायत सदस्य निशा कनवाल ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को दूरभाष पर सूचना दे स्थित की जानकारी दी। आरोप लगाया की पुलिस प्रशासन आपस में ही उलझा हुआ है पर शव नदी से बाहर नहीं निकाला जा रहा। ग्रामीणों के आक्रोशित होने व कुमाऊं आयुक्त तक मामला पहुंचते ही हरकत में आई पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से कोसी नदी क्षेत्र से शव को बामुश्किल बाहर निकाल शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। महिला की मौत कैसे हुई यह अभी रहस्य बना हुआ है। इस दौरान ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह परिहार, जिंप सदस्य प्रतिनिधि गोपाल कनवाल, पूरन सिंह, कैलाश जलाल, देव सिंह, चंदन मेहरा, दीवान सिंह, हिम्मत सिंह, रुप सिंह, पान सिंह, जीवन मेहरा, लाल सिंह जलाल, बचे सिंह, भीम सिंह, दीवान सिंह, गोपाल सिंह समेत तमाम ग्रामीण मौजूद रहे।