🔳 कैंची से काकड़ीघाट तक जगह जगह मुंह उठाए खड़ा है खतरा
🔳 जान हथेली पर आवाजाही करते हैं यात्री व पर्यटक
🔳 हाईवे से सटी पहाड़ियों से गिरते पत्थर कई जिंदगियां कर चुके खत्म
🔳 कमजोर पड़ चुकी पहाड़ियां से कब गिर जाए पत्थर कोई भरोसा नहीं
[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर कैंची क्षेत्र से काकड़ीघाट तक करीब बीस किलोमीटर दायरे में जगह-जगह खतरा मुंह उठाए खड़ा है। कमजोर पड़ चुकी पहाड़ियों से गिरते पत्थरों के बीच वाहन चालक, यात्री व पर्यटक जान जोखिम में डाल आवाजाही को मजबूर हो चुके हैं। लगातार मंडरा रहे खतरे के बीच लोग भगवान भरोसे सफर तय करते हैं। पहाड़ियों से गिरे पत्थरों से पूर्व में कई लोगों की जिंदगी तक खत्म हो चुकी है।
कुमाऊं की लाइफ लाइन के नाम से पहचान रखने वाले अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर सफर बेहद खतरनाक हो चुका है। कैंची धाम से अल्मोड़ा की ओर करीब बीस किलोमीटर दायरे में पाडली, रातीघाट, रामगाढ़, दोपांखी, खैरना, भोर्या बैंड, चमड़ियां, लोहाली, जौरासी, नावली तथा काकडीघाट क्षेत्र में पहाड़ियों पर गिरताऊ हालत में पहुंच चुके बड़े-बड़े पत्थर जोखिम बढ़ा रहे हैं। बारिश के साथ ही खतरा कई गुना बढ़ जा रहा है। पूर्व में कई लोग पत्थरों की चपेट में आने से जान गंवा चुके हैं। पहाड़ी से गिरे मलबे व पत्थरों से कई लोग गंभीर रुप से घायल तक हो चुके हैं। खतरा लगातार बढ़ने से आवाजाही करने वाले लोगों की जिंदगी पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। क्षेत्रीय जन विकास संघर्ष समिति अध्यक्ष मनीष तिवारी के अनुसार हाईवे पर बीस किलोमीटर दायरे में कई जगह खतरा मंडरा रहा है। समय पर पहाड़ी का उपचार न होने से नए डेंजर जोन भी उभर चुके हैं जिससे लगातार खतरा बढ़ रहा है। स्थानीय वीरेंद्र सिंह बिष्ट, गजेंद्र सिंह नेगी के अनुसार खैरना से काकड़ीघाट के बीच चौड़ीकरण से भी कई जगह खतरा बढ़ गया है। चौड़ीकरण के बाद से नए डेंजर जोन सामने आए हैं। हाईवे चौड़ीकरण के बाद मजबूत सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए जिससे लगातार पहाड़ियां कमजोर होती चली गई। सुरक्षात्मक कार्यों के न होने से अब आवाजाही बेहद खतरनाक हो चुकी है। देवभूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष पुष्कर सिंह पनौरा, भरत जलाल, फिरोज अहमद, कुबेर सिंह जीना, प्रकाश जोशी, संजय सिंह बिष्ट, भैरव नैनवाल, कुंदन सिंह आदि ने समय रहते पहाड़ियों के उपचार को ठोस कदम उठाए जाने पर जोर दिया है ताकि भविष्य में आवाजाही सुरक्षित हो सके।
