🔳 जाम के मद्देनजर गांवों से दूध न उठाने का फरमान जारी
🔳 विभिन्न गांवों के लोग दुग्ध व्यवसाय से जुड़े करते हैं गुजर बसर
🔳 ग्राम प्रधान चौरसा ने जताई गहरी नाराजगी
🔳 जाम से अब ग्रामीणों की आर्थिकी बिगड़ने पर जताई चिंता
[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर कैंची क्षेत्र में लगने वाले जाम का असर अब आसपास के गांवों के लोगों की आर्थिकी पर भी पड़ने लगा है। कैंची से आगे के क्षेत्रों में जहां व्यवसाय बुरी तरह चरमरा गया है वहीं अब दुग्ध उत्पादकों पर भी संकट गहरा गया है। जाम की स्थिति को देख दुग्ध उत्पादकों के दूध का एकत्रीकरण न करने के फरमान से पंचायत प्रतिनिधियों व दुग्ध उत्पादकों में गहरा रोष व्याप्त है।
शनिवार को हाईवे पर जाम की स्थिति से गरमपानी, खैरना समेत आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न कंपनियों के दूध आपूर्ति किए जाने वाहन भी दोपहर में बाजार क्षेत्रों में पहुंचे वहीं गांवों से दुग्ध डेरी को भेजा जाने वाला दूध भी शाम तक फंसा रहा। अब रविवार को भी जाम की स्थिति के मद्देनजर गांवों से एकत्रित किए जाने वाले दूध को न लेने के फरमान से पंचायत प्रतिनिधियों व दुग्ध व्यवसाय से जुड़े दुग्ध व्यवसायियों ने गहरी नाराजगी जताई है। ग्राम प्रधान चोरसा किशोर ढैला के अनुसार दुग्ध समितियों ने बुधलाकोट, कफूल्टा, चोरसा, पाडली, रामगाढ, जाख आदि गांवों के दुग्ध उत्पादकों को रविवार को समितियों में दूध न भेजने का फरमान जारी किया है। आरोप लगाया की विभिन्न गांवों से प्रतिदिन पांच सौ लीटर से अधिक दूध डेरी में भेजा जाता है। जाम के कारण दूध न लिए जाने से निश्चित ही दुग्ध उत्पादकों को नहीं नुकसान का सामना करना पड़ेगा। ग्राम प्रधान किशोर ने लंबे समय से चली आ रही जाम का स्थाई समाधान न होने पर गहरा रोष जताया है। दुग्ध व्यवसाय से जुड़े ग्रामीणों के अनुसार अव्यवस्था से अब आर्थिक स्थिति पर भी संकट गहराने का अंदेशा बढ़ गया है। दो टूक कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान न किया गया तो गांवों में आय का एकमात्र साधन दुग्ध व्यवसाय भी चौपट हो जाएगा।
