🔳 जंगल में धधकी आग के बड़े हिस्से में फैलने से मचा हड़कंप
🔳 वन संपदा के साथ ही मवेशियों की चारा पत्ती भी हुई खाक
🔳 आए दिन धधक रहे जंगलों से वन विभाग के दावे फेल
🔳 जंगलों को बचाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने की उठी मांग
[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]
पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रीष्मकाल से पहले ही जंगल आग से राख होते जा रहे हैं। अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे से सटे डटवाल गांव क्षेत्र का जंगल में धधकी वनाग्नि ने बड़े पैमाने पर वन संपदा को नुकसान पहुंचा डाला। देखते ही देखते लपटों ने विकराल रुप धारण कर लिया। देर शाम तक जंगल क्षेत्र से धुएं का गुबार उठता रहा।
वन विभाग के बड़े बड़े दावों व जागरुकता अभियान में सरकारी धनराशि खर्च किए जाने के बावजूद जंगलों में आग का कहर जारी है। बीते दिनों हाईवे से सटे सूण गांव में जंगल से उठी आग की लपटों ने 123 वर्ष पुराने आवासीय भवन को जलाकर राख कर डाला। थुआ के जंगल में भी आग वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा चुकी है। मंगलवार को हाईवे पर स्थित नैनीपुल क्षेत्र के ठिक सामने कोसी नदी पार डटवाल गांव से सटा जंगल आग की चपेट में आ गया। खड़ी चट्टान पर स्थित जंगल से उठती आग की विकराल लपटें देख आसपास के क्षेत्रों के लोग भी दहशत में आ गए। एकाएक तेज हुई हवा की रफ्तार ने आग को बड़े पैमाने पर फैला दिया। विकराल हुई लपटों से बेसकिमती वन संपदा के साथ मवेशियों की चारा पत्ती भी जलकर नष्ट हो गई। जंगली जानवरों को भी नुकसान पहुंचने का अंदेशा है। जंगल क्षेत्र से घंटो तक धुएं का गुबार उठता रहा। समाजसेवी कुबेर सिंह जीना ने जंगलों को आग से बचाने को ठोस उपाय किए जाने की मांग वन विभाग से की है। कहा की यदि समय रहते जंगलों को आग से बचाने को ठोस रणनीति तैयार नहीं की गई तो भविष्य में हालात बिगड़ सकते हैं।
