🔳 जल विद्युत परियोजना रामगाढ़ में सत्तर किलोवाट तक गिरा उत्पादन
🔳 सौ किलोवाट उत्पादन करने वाली परियोजना तीस किलोवाट पर पहुंची
🔳 परियोजना से जुड़े है तमाम गांवों के साढ़े चार सौ से अधिक उपभोक्ता
🔳 यूपीसीएल से बिजली खरीद उपभोक्ताओं को आपूर्ति बनी मजबूरी
[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]

बढ़ते तापमान का असर अब नदियों में भी साफ दिखने लगा है। रामगाढ क्षेत्र में स्थित जल विद्युत परियोजना के उत्पादन में भी करीब सत्तर फीसदी की गिरावट आ गई है। उत्पादन घटने से उरेडा विभाग यूपीसीएल से बिजली लेकर उपभोक्ताओं को आपूर्ति कर रहा है। प्रतिदिन सौ किलोवाट तक बिजली उत्पादन करने वाले जल विद्युत परियोजना के महज तीस किलोवाट उत्पादन में सिमट जाने से विभागीय अधिकारियों की चिंता भी बढ़ गई है।
लगातार बढ़ रही तपीश व आग से धधक रहे जंगलों का असर अब नदी नालों में साफ नजर आने लगा है। गांवों में प्राकृतिक जल स्रोत तक सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। बारिश न होने से नदियों का जल स्तर भी बेहद कम हो चुका है। अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर रामगढ़ स्थित जल विद्युत परियोजना से आसपास के बारगल, कफूल्टा, गरजोली, ज्योग्याडी, बुधलाकोट, चौरसा समेत तमाम गांवों के लगभग साढ़े चार सौ से भी अधिक उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति होती है। रामगाढ़ नदी क्षेत्र में बनी परियोजना से प्रतिदिन सौ किलोवाट तक बिजली का उत्पादन होता है। जिसे उपभोक्ताओं व यूपीसीएल को बेचकर संबंधित विभाग मुनाफा कमाता है। पिछले दो सप्ताह से भी अधिक समय से नदी में पानी कम हो जाने से उत्पादन सत्तर फीसदी तक गिर गया है। सौ किलोवाट तक बिजली उत्पादन करने वाली परियोजना से महज तीन किलोवाट उत्पादन होने से गांवो को भी समुचित आपूर्ति नहीं हो पा रही। मजबूरी में यूपीसीएल से बिजली खरीद उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जा रही है। नदी के लगातार गिरते जलस्तर से विभागीय अधिकारियों की चिंताएं बढ़ने लगी है। लगातार बढ़ रही तपीश व बारिश न होने से भविष्य में उत्पादन के गिरने का अंदेशा है। परियोजना में कार्यरत आपरेटर राजेंद्र सिंह मनराल के अनुसार नदी में लगातार पानी कम होने से उत्पादन गिरता ही जा रहा है। यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो उत्पादन शून्य पर पहुंच सकता है। फिलहाल यूपीसीएल से बिजली लेकर उपभोक्ताओं को आपूर्ति की जा रही है।

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