= खेत रोखड़ में तब्दील उपज भी हुई बर्बाद, मुआवजा नाकाफी
= भारी नुकसान के बावजूद रत्ती भर मुआवजे को दिया उपेक्षा करार
= शासन प्रशासन से की उचित मुआवजा देने की मांग
(((ब्यूरो चीफ विरेन्द्र बिष्ट/फिरोज अहमद/कुबेर जीना की रिपोर्ट)))
आपदा को 7 महीने बीतने के बाद किसानों को मिले मुआवजा मुआवजे ने किसानों के जख्म हरे कर दिए हैं बर्बाद हुई कृषि भूमि व उपज का महल आंशिक रूप से मुआवजा मिल सका है नुकसान के सापेक्ष बहुत कम मुआवजा मिलने से गांव के लोग हताश हैं लोगों ने इसे उपेक्षा करार दिया है। गांव के लोगों ने उचित मुआवजा दिए जाने की पुरजोर मांग उठाई है।
अक्टूबर में हुई मूसलाधार बारिश के बाद बेतालघाट गांवों के तमाम गांव में भारी नुकसान हुआ। किसानों की कृषि भूमि रोखड़ में तब्दील हो गई। खेतों की उपज भी बर्बाद हुई। हालात यह है कि अभी तक किसान नुकसान से नहीं उभर सके हैं वहीं अब मुआवजे के तौर पर महज एक से तीन हजार रुपये तक की राशि के चेक मिलने से किसानों के जख्म हरे हो गए हैं। किसानों का आरोप है कि भारी नुकसान होने के बावजूद आंशिक मुआवजा दिया जा रहा है जो नाकाफी है। आज तक खेतों को नहीं सुधारा जा सका है। अधिकांश लोगों को एक हजार रुपये ही मुआवजा मिला है। बुधवार को बेतालघाट ब्लॉक के जाख, पाडली, हरतपा, बुधलाकोट आदि गांवों के लोग अल्मोडा़ हल्द्वानी हाईवे पर स्थित रामगाढ़ पटवारी चौकी में मुआवजे का चेक लेने पहुंचे तो खुद का दर्द बयां किया। जाख गांव के पूरन राम, तारा सिंह, किशन राम, दीप चंद्र तथा बुधलाकोट गांव के जीवन चंद, हरीश चंद्र, बिशन दत्त तथा पाडली गांव के हयात सिंह, बहादुर सिंह, भगवती देवी, देवकी देवी, जीवंती देवी ने मुआवजे के तौर पर मिलने वाले चेक पर नाराजगी जताई। कहा कि बेहद कम मुआवजा बांटा गया है। ग्रामीणों ने सरकार से नुकसान की भरपाई का उचित मुआवजा दिए जाने की पुरजोर मांग उठाई है। एसडीएम राहुल शाह ने बताया कि मानकों के अनुसार ही मुआवजा वितरित किया जा रहा है।
