🔳 जाम से निपटने को भवाली से कैंची तक संचालित की जा रही शटल सेवा
🔳 पर्यटकों के कैंची से ही वापस लौट जाने से आगे के बाजारों में पसरा सन्नाटा
🔳 बाजार के सूना होने से व्यापारी हुए मायूस
🔳 व्यापारियों के हितों से खिलवाड़ किए जाने का लगाया आरोप
🔳 उठाई व्यवस्था में सुधार किए जाने की मांग
[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर जाम की समस्या से निपटने को बनाई गई शटल सेवा की रणनीति कैंची क्षेत्र से आगे के बाजारों में विभिन्न व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। पर्यटकों के कैंची से ही वापस लौट जाने से तमाम बाजारों में पर्यटन व्यवसाय चौपट हो गया है। व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन पर हितों से खिलवाड़ किए जाने का आरोप लगाया है। साफ कहा की व्यापार चौपट होने से आर्थिक स्थिति भी बिगड़ने लगी है।
कैंची क्षेत्र में लगने वाले जाम से निजात दिलाने को पुलिस प्रशासन नई नई रणनीति तैयार करने में जुटा है। जाम की समस्या खत्म करने को अब शटल सेवा का संचालन किया जा रहा है। विकेंड पर शटल सेवा के जरिए पर्यटक व श्रद्धालु कैंची पहुंच रहे हैं और फिर शटल सेवा से ही वापस भी लौट जा रहे हैं। वहीं मालवाहक वाहनों को भी नैनीताल व अल्मोड़ा जनपद के बोर्डर पर रोक लिया जा रहा है। पुलिस प्रशासन की व्यवस्था अब पहाड़ के व्यापारियों पर भारी पड़ने लगी है। पर्यटकों व श्रद्धालुओं के कैंची से ही वापस लौटने से गरमपानी, खैरना, छड़ा, लोहाली, चमड़ियां, जौरासी, नावली, काकड़ीघाट, सुयालबाडी, नैनीपुल, क्वारब तथा पातली, भुजान, बजोल, बमस्यू आदि बाजार क्षेत्रों में सन्नाटा पसर जा रहा है। होटल, रेस्टोरेंट व होम स्टे संचालक मायूस हो चुके हैं। व्यापारियों ने आरोप लगाया की वर्ष भर पर्यटन सीजन का इंतजार रहता है पर पुलिस प्रशासन की व्यवस्था से करोबार चौपट होता जा रहा है। व्यवसाय प्रभावित होने से आर्थिक स्थिति भी बिगड़ते ही जा रही है। प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष विरेन्द्र सिंह बिष्ट, अध्यक्ष गजेंद्र सिंह नेगी, पंकज नेगी, मनीष तिवारी, फिरोज अहमद, राकेश जलाल, दीवान सिंह बिष्ट, सुनील मेहरा आदि ने व्यापारी हितों से खिलवाड़ होने पर गहरी नाराजगी जताई है। आरोप लगाया की व्यापारी व उसके परिवार की आजिविका व्यवसाय पर ही निर्भर है। कारोबार पर चौपट कर हितों से खुला खिलवाड़ किया जा रहा है। दो टूक कहा की जाम की समस्या को खत्म करने के लिए ठोस उपाय किए जाए न की व्यापारियों के हितों से खिलवाड़। उपेक्षा पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।