🔳 बेतालघाट व रामगढ़ ब्लॉक में अधिकांश विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे
🔳 महज एक शिक्षक की तैनाती से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
🔳 नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ किए जाने का भी आरोप
🔳 बेतालघाट के 35 तथा रामगढ़ ब्लॉक के 60 विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित
🔳 बच्चों के भविष्य की खातिर गांव छोड़ने को मजबूर हुए अभिभावक
[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]

बेतालघाट व रामगढ़ ब्लॉक के अधिकांश विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित है। कई विद्यालयों में व्यवस्था के सहारे दूसरे विद्यालयों से शिक्षक भेज विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी एक ही शिक्षक पर होने पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बेतालघाट में लगभग 35 तो वहीं रामगढ़ ब्लॉक में करीब 60 प्राथमिक विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित है। गांवों में स्थित विद्यालयों में महक एक ही शिक्षक की तैनाती से विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने गहरी नाराजगी जताई है।
पहाड़ के लोग पहाड़ जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हो चुके हैं। स्वास्थ्य समेत कई सुविधाएं चुनौती बन चुकी है वहीं अब नौनिहालों तक का भविष्य खतरे में है। बेहतर शिक्षा न मिलने से बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। प्राथमिक शिक्षा का पाठ लेने बच्चे विद्यालय तो जा रहे हैं पर स्कूल में समुचित शिक्षकों की तैनाती ही न होने से बच्चों की बुनियादी शिक्षा कैसे मजबूत होगी इस पर सवाल खड़े हो जा रहे हैं। गांवों में स्थित विद्यालयों में एक ही शिक्षक पहली से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाले है। बेतालघाट ब्लॉक के खैरना, गरमपानी, सीम, ब्यासी, छड़ा, खैरनी, हल्सों कोरण, चडूयूला समेत करीब 35 विद्यालयों में महज एक ही शिक्षक की तैनाती है। पढ़ाई की जिम्मेदारी के साथ ही शिक्षक पर कार्यालयी कार्यों का भी भार है ऐसे में नौनिहालों का भविष्य रामभरोसे है। रामगढ़ ब्लॉक में भी हालात विकट है। सिरसा , चांफा, कमोली, सुयालबाडी, छियोडी, चापड़, बैरोली, सिमायल, दियारी, टिकुरी समेत लगभग 60 विद्यालयों में महज एक – एक शिक्षक की तैनाती है। दोनों ही ब्लॉकों में शिक्षा व्यवस्था बेहद बुरे दौर से गुजर रही है। इंटर कॉलेजों में तक महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ताओं के पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं। शिक्षकों के न होने से गांव के लोगों को बच्चों के भविष्य की खातिर गांव छोड़कर शहरों की ओर रुख करने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश सचिव शेखर दानी, व्यापारी नेता कुबेर सिंह जीना, मदन सुयाल, विरेन्द्र सिंह बिष्ट, पंकज नेगी, मनीष तिवारी, फिरोज अहमद, राकेश जलाल, दीवान सिंह, मनोज सिंह बिष्ट आदि ने गांवों में स्थित विद्यालयों की स्थिति पर रोष जताया है। आरोप लगाया है की नौनिहालों के भविष्य से खुला खिलवाड़ किया है। लगातार आवाज उठाए जाने के बावजूद शिक्षा विभाग कुंभकरणीय नींद में है। प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी सत्येन्द्र बेरी के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है। कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती की गई है। व्यवस्था में सुधार के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उच्चाधिकारियों को भी पत्राचार किया गया है।