🔳 सिंचाई के पानी को मोहताज हुए सूरीफार्म क्षेत्र के किसान
🔳 पांच वर्ष से सिंचाई के पानी की राह देख पथराई आंखें
🔳 लंबा समय बीतने के बाद भी सुध न लिए जाने से खेतीबाड़ी से हुआ मोहभंग
🔳 पंडित गोविंद बल्लभ पंत अनुसंधान केंद्र में भी प्रभावित होने लगे कार्य
[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]
सब्जी व अनाज उत्पादन के क्षेत्र में अव्वल रहने वाले मझेडा ग्राम पंचायत के सूरीफार्म तोक में किसानों के खेत सिंचाई के पानी के अभाव में बंजर हो चुके हैं। जिन खेतों में कभी फसल लहलहाती थी वहां आज झाड़ियां खड़ी है। बीते पांच वर्ष से अब तक किसानों को सिंचाई के पानी के नाम पर बूंद तक नसीब नहीं हो सकी है। समीप स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत अनुसंधान केंद्र में भी सिंचाई का पानी न मिलने से तमाम कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
मझेडा ग्राम पंचायत समेत आसपास के तोको में खेतीबाड़ी के कार्य से जुड़े किसानों को मझेडा नहर से सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाता है पर पांच वर्ष पूर्व मूसलाधार बारिश से उफान पर आई शिप्रा नदी ने नहर के हेड को तहस नहस कर डाला। भूस्खलन से नहर कई स्थानों पर जमींदोज हो गई। राज्य सरकार ने नहर के पुनर्निर्माण को लगभग 75 लाख रुपये के बजट को स्वीकृति दी पर लंबा समय बीतने के बावजूद आज तक किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच सका है। पानी की उपलब्धता शून्य हो जाने से किसानों ने भी खेती से मुंह मोड़ लिया नतीजतन गांव में खेत बंजर हो चुके हैं। खेतों में खड़ी बड़ी बड़ी झाड़ियां स्थित की हकीकत बयां कर रही है। किसानों ने आरोप लगाया है कि पांच वर्ष के लंबे अंतराल के बाद भी आज तक नहर का पुनर्निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है जिसका खामियाजा खेतीबाड़ी से जुड़े लोगों को भुगतना पड़ रहा है स्थानीय दीपक पांडे, योगेश पांडे, डिकंबर त्रिपाठी, सुनील सिंह, विरेन्द्र सिंह बिष्ट, प्रेम गोस्वामी, कृपाल मेहरा, पुष्कर सिंह आदि ने मझेडा नहर से जल्द सिंचाई के पानी की आपूर्ति किए जाने की मांग उठाई है। दो टूक चेताया है कि यदि किसानों के हितों से खिलवाड़ किया गया तो सिंचाई विभाग के खिलाफ आंदोलन शुरु किया जाएगा। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता नीरज तिवारी के अनुसार तीन किमी तक पानी पहुंचा दिया गया है। शेष दो किमी क्षेत्र में युद्धस्तर से कार्य गतिमान है। जल्द ही नहर में पानी की आपूर्ति किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
