🔳 प्यूडा गांव में हुई कार्यशाला में वन पंचायत सरपंचों को दी गई अहम जानकारियां
🔳 मानव वन्यजीव संघर्ष व वनाग्नि रोकने के बताए तौर तरीके
🔳 क्षेत्रवासियों को भी जागरुक करने का किया आह्वान
🔳 सरपंचों को अधिकारों व कर्तव्यों की भी दी जानकारी
[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]
उत्तरी गौला वन क्षेत्र के तत्वावधान में वन पंचायत प्रतिनिधियों के एकदिवसीय कार्यशाला में मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने तथा वनों को आग से बचाने मंथन किया गया। वन पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीणों को कई अहम जानकारियां दे जागरुक भी किया गया। सरपंचों को कर्तव्यों व अधिकारों की जानकारी भी दी गई।
बुधवार को रामगढ़ ब्लॉक के प्यूड़ा गांव स्थित जन- मिलन केंद्र में मानव वन्य संघर्ष व वनाग्नि के प्रति जागरुकता के विषय पर हुई कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख रामगढ़ दीप चंद्र आर्या तथा विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत सदस्य ज्योति आर्या ने किया। वक्ताओं ने मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने को सावधानी बरतने व वनाग्नि रोकथाम को जनता से जान बूझकर वनों में आग न लगाने तथा किसी क्षेत्र में वनाग्नि की घटना घटित होने पर सूचना देने का आह्वान किया गया। वन क्षेत्राधिकारी विजय चंद्र भट्ट ने मानव वन्य जीव संघर्ष व वनाग्नि रोकथाम को आवश्यक जानकारी दी। वनाग्नि के मुख्य कारणों व भयावह परिणामों को भी साझा किया। कहा की वनाग्नि के कारण ही वन्य जीव आबादी क्षेत्रों की ओर रुख करने को मजबूर हो जाते हैं। घरों के आस-पास झाड़ियों को हटाने, समुचित रोशनी व मवेशियों की सुरक्षा की उचित व्यवस्था की अपील की। वन पंचायत प्रतिनिधियों को वर्ष 2024 में वन पंचायत नियमवाली में संशोधन के उपरांत जोड़े गए नए नियमों को बारीकी के साथ समझाया। साथ ही वन पंचायत सरपंचों के अधिकार तथा कर्तव्यों के विषय में भी जानकारी दी। इस दौरान ग्राम प्रधान निर्मला जीना, भुवन चन्द्र आर्या, रेखा बिष्ट, सरपंच संगठन अध्यक्ष कमल सुनाल, धर्मेन्द्र बिष्ट, दीपा कबड़वाल भीम सिंह, राकेश राणा, बृजेश विश्वकर्मा, संजय टम्टा, वीरपाल सिंह, विपिन बिष्ट, मनोज कैड़ा, दीवान सिंह, रोहित रेकुनी, धर्मानन्द शर्मा, नंदकिशोर, लालू आर्या, मोहन बिष्ट, प्रमोद बिष्ट आदि मौजूद रहे।
