🔳 मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल में दर्ज हुई शिकायत
🔳 मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग
🔳 मामले के सामने आने से सवालों के घेरे में आया पशुपालन विभाग
🔳 बेतालघाट ब्लॉक के हरिनगर हरतोला गांव से जुड़ा है मामला
[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]
बेतालघाट ब्लॉक के हरिनगर हरतोला गांव में गोट वैली योजना में फर्जीवाड़े का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। स्थानीय ग्रामीण ने मामले की जांच की मांग उठा शिकायत मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल पर भी दर्ज करा दी है। पशुपालकों के लिए राज्य सरकार से संचालित योजना में गड़बड़ी का आरोप लगने से पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रदेश सरकार ने पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गोटवैली योजना का श्रीगणेश किया। पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी वंदना सिंह के विशेष प्रयासों से बेतालघाट ब्लॉक के तमाम गांवों में बड़ी संख्या में पशुपालकों को चिह्नित कर योजना से लाभान्वित भी किया गया। योजना के तहत पशुपालकों को शुरुआत में पांच बकरियों को खरीदने के लिए तीस हजार रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया। दोबारा पशुपालकों को दस बकरियों व एक बकरा खरीदने के लिए 51 हजार रुपये की अनुदान राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया। अभी वर्तमान में योजना परवान चढ़ ही रही थी की विकासखंड के हरिनगर हरतोला गांव में योजना सवालों के घेरे में आ गई हैं। गांव के ललित प्रसाद ने योजना में फर्जीवाड़े का आरोप लगा जांच की मांग उठाई है। मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा बताया है कि गांव में तीन लोगों को योजना के तहत लाभान्वित किया गया। तीनों ही लोगों ने बकरियां खरीददारी न कर किसी दूसरे पशुपालक की बकरियां विभाग के सामने प्रस्तुत कर दी। फर्जी ढंग से टैग तक लगा दिया गया। पैसा हड़पने के बाद बकरियां उसके मलिक को वापस कर दी गई। आरोप लगाया कि पूरे मामले में पशुपालन विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। ललित प्रसाद ने मामले की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है। पशुचिकित्साधिकारी खैरना डा. आयुष सिंह के अनुसार मामला अभी संज्ञान में नहीं आया है। यदि गड़बड़ी हुई है तो निश्चित ही जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
