◾ दाडिमा गांव में हुई बैठक में वन पंचायत सरपंचों ने जताई चिंता
◾ सरकार पर भी लगाया उपेक्षा किए जाने का आरोप
◾ सरपंचों के हक व वन अधिकार कानून को संघर्ष का एलान

((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))

रामगढ़ ब्लॉक के दाडिमा गांव स्थित सामुदायिक भवन में वन पंचायत सरपंचो की बैठक में तमाम अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। अनियंत्रित निर्माण कार्यों से जल, जंगल, जमीन पर मंडरा रहे खतरे पर चिंता जताई गई। सर्वसम्मति से तय हुआ की सरपंचों के हक हकूक के लिए एकजुट होकर संघर्ष किया जाएगा।

दाडिमा गांव स्थित सामुदायिक भवन में हुई वन पंचायत सरपंचों की बैठक की अध्यक्षता चंपा देवी ने की। चंपा देवी ने कहा कि सरकार लगातार वन पंचायत नियमावली में फेरबदल कर वन पंचायतों के परंपरागत अधिकार पर प्रतिबंध लगाने का काम कर रही है। सरपंच की भूमिका चौकीदार की बना दी गई है जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने वन पंचायतों के आसपास बाहरी बिल्डरों के सक्रिय होने तथा अनियंत्रित तरीके से हो रहे निर्माण कार्यों पर चिंता जताई। कहा कि अनियंत्रित निर्माण कार्यों से जल, जंगल, जमीन पर संकट खड़ा हो रहा है। वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष कमल सुनाल व गोपाल लोधियाल ने कहा कि सरपंचों के हक हकूक व वन अधिकार कानून के लिए एकजुट होकर संघर्ष किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन जगदीश चंद्र ने किया। जगदीश चंद्र ने कहा कि बाहरी लोगों की आवाजाही तेजी से बढ़ रही है। अनियंत्रित निर्माण कार्य भविष्य के लिए घातक है। तय हुआ कि ग्राम स्तरीय वन अधिकार गठन को लेकर प्रत्येक सप्ताह बैठक की जाएगी। इस दौरान गौरव नयाल, सुधीर कुमार, मोनू भट्ट, खुशाल बिष्ट, राजू रैकवाल, चंद्र प्रकाश, बसंती रैकवाल, अशोक थापा, कुंदन सिंह, ममता रैकवाल, पूजा थापा आदि मौजूद रहे।

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