= राजस्व उपनिरीक्षकों की कमी से जूझ रही तहसीले
= एक राजस्व पट्टी में है 12 से ज्यादा गांव
= पटवारी चौकियां भी हुई विरान
= एक राजस्व उपनिरीक्षक पर तीन से चार राजस्व पट्टियों का जिम्मा

(((ब्यूरो चीफ विरेन्द्र बिष्ट/फिरोज अहमद/सुनील मेहरा/भीम बिष्ट की रिपोर्ट)))

राजस्व उपनिरीक्षकों की कमी से गांवों के लोगों को ही परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा बल्कि कई सरकारी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं जिस कारण कर्मचारियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक राजस्व उपनिरीक्षक के ऊपर तीन से चार राजस्व पट्टियों का जिम्मा है। राजस्व उपनिरीक्षकों की कमी के चलते लाखों की लागत से बनाई गई पटवारी चौकियां भी विरान हो चुकी हैं। हालांकि एसडीएम का दावा है कि रोस्टर बनाकर पटवारियों को चौकियों में बैठने के निर्देश दिए गए हैं। वही बदहाल हो चुकी चौकियों की मरम्मत को भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
बेतालघाट तथा कोश्या कुटोली तहसील में अट्ठारह राजस्व पट्टियां हैं।एक राजस्व पट्टी में करीब बारह से ज्यादा गांव शामिल है। दूरदराज के गांवों के लोग कार्य कराने के लिए पटवारी चौकियों में पहुंचते हैं पर पटवारी चौकियों में राजस्व उपनिरीक्षकों के ना होने व क्षेत्र में जाने से मायूस होकर ग्रामीणों को वापस लौटना पड़ता है। आलम यह है कि एक राजस्व उपनिरीक्षक के ऊपर करीब तीन से चार राजस्व पट्टियों का जिम्मा है। राजस्व उपनिरीक्षकों की कमी के कारण लाखों रुपयों की लागत से बनाई गई पटवारी चौकिया भी बदहाल हालत में है। रखरखाव ना होने से पटवारी चौकियां वीरान हो चुकी है। कई जगह झाड़ियां तक उग चुकी हैं वहीं कुछ चौकिया जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। एसडीएम कोश्या कुटोली राहुल शाह के अनुसार राजस्व उपनिरीक्षकों की कमी से काफी दिक्कत है। एक उपनिरीक्षक के ऊपर तीन से चार पट्टियों की जिम्मेदारी है। फिलहाल पटवारियों को रोस्टर बनाकर चौकियों में बैठने के निर्देश दिए गए हैं। बदहाल हो चुकी चौकियों की मरम्मत के लिए भी प्रस्ताव बनाया जा रहा है।