🔳 लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ा रही चिंता
🔳 आश्रम परिसर में समुचित प्रबंध पर बाहर नहीं है ठोस उपाय
🔳 बीस किमी दूर नैनीताल में स्थापित है फायर स्टेशन
🔳 गरमपानी व रातीघाट में स्थापित होगा स्टेशन तो खत्म होगी चिंता
[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]
गरमपानी डेस्क : अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर स्थित सुप्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या दिनों-दिन बढ़ने के साथ ही अब भगदड़ व अग्नि सुरक्षा के ठोस उपायों की जरुरत भी महसूस होने लगी है हालांकि आश्रम परिसर में अग्नि सुरक्षा को ठोस इंतजाम है पर आश्रम के बाहर किसी भी घटना से निपटने के लिए करीब बीस किमी दूर दमकल सेवा पर निर्भर रहना ही मजबूरी है वहीं भगदड़ की स्थिति से निपटने को चौकी पुलिस कैंची व होमगार्ड के जवानों पर ही व्यवस्था निर्भर है।
हाईवे पर स्थित कैंची धाम में देश के विभिन्न राज्यों से रोजाना हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। बीते दिनों एक ही दिन में 60 हजार भक्तों के कैंची धाम पहुंचने से अब किसी भी विपरित परिस्थितियों से निपटने को व्यवस्थाएं चाक चौबंद होनी भी जरुरी हो गई है। हजारों भक्तों के उमड़ने से व्यवस्थाओं के चरमराने के बाद अब पुलिस प्रशासन ने पंजीकरण व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं को आश्रम भेजने की रुपरेखा तैयार कर ली है जिसे अमली जामा पहनाया जाना शेष है। आश्रम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर गौर करें तो सुरक्षा व्यवस्था मंदिर प्रबंधन व निजी कंपनी के 12 जवानों पर निर्भर है वहीं अग्नि सुरक्षा के भी ठोस उपाय उपलब्ध है। किसी भी विपरित परिस्थितियों से निपटने को तीन हाॅज रिल, फायर अलार्म तथा पचास लीटर का एक व नौ लीटर का फोम स्थापित किया गया है जबकि चालीस हाईटेक अग्निशामक यंत्र भी स्थापित किए गए हैं पर आश्रम के बाहर बाजार क्षेत्र में अप्रिय घटना से निपटने को पुख्ता इंतजाम नहीं है। दमकल सेवा के लिए भी बीस किमी दूर नैनीताल जिला मुख्यालय पर निर्भर रहना मजबूरी है। ऐसे में दमकल सेवा के नैनीताल से पहुंचने तक स्थिति के बिगड़ने की संभावना को झूठलाया नहीं जा सकता। मंदिर प्रबंधन ने भी आसपास फायर स्टेशन की जरुरत पर जोर दिया है। प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष विरेन्द्र सिंह बिष्ट के अनुसार लंबे समय से फायर स्टेशन स्थापित किए जाने की मांग उठाए जाने के बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा। कोतवाल भवाली प्रकाश मेहरा के अनुसार ग्रीष्मकाल में दमकल वाहन की तैनाती रहती है। समय समय पर माॅक ड्रिल के जरिए भी किसी भी परिस्थिति से निपटने का अभ्यास किया जाता है।
